लेखनी प्रतियोगिता -20-Jan-2022
गहरी स्याह सर्द रातों में, तुम कहाॅ॑ जाओगे,
बच कर उसकी यादों से , तुम कहाॅ॑ जाओगे।
बेकरारी ये तुम्हारी कर रही हाले-दिल बयां,
वो गुज़रेगी जिस राह से, तुम वहाॅ॑ जाओगे।
ख़्वाब, सुकून, लम्हा, जिन्दगी और उम्मीदें,
ये तमाम जरूरतें छोड़, तुम कहाॅ॑ जाओगे।
बुझा देती है दुनिया, रोशन करने वालों को ही,
चिराग जैसी फितरत ले, तुम कहाॅ॑ जाओगे।
उरूज और जवाल हैं महज़ दुनियावी बातें,
हर उस बस्ती में होंगी ये, तुम जहाॅ॑ जाओगे।
ख़्वाब तो रंगीन सजा लिए हैं तुमने ‘सुगत’,
लेकिन इन्हें, पूरा करने, तुम कहाँ जाओगे।
*© Vardan Jindal 'सुगत'*
Sudhanshu pabdey
21-Jan-2022 11:36 AM
Very beautiful 👌
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Punam verma
21-Jan-2022 08:59 AM
Very nice
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Swati chourasia
21-Jan-2022 07:45 AM
Wahh bohot hi khubsurat rachna 👌👌
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Vardan Jindal "सुगत"
21-Jan-2022 08:19 AM
बहुत आभार आपका महोदया जी ❤️🙏
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